श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.79.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 79 · अथैकोनाशीतितमोऽध्यायः

वैजयन्तीं ददुर्मालां श्रीधामाम्लानपंकजाम्।

रामाय वाससी दिव्ये दिव्यान्याभरणानि च॥ ८

vaijayantīṃ dadurmālāṃ śrīdhāmāmlānapaṃkajām|

rāmāya vāsasī divye divyānyābharaṇāni ca|| 8

अर्थ

इसके बाद ऋषियोंने बलरामजीको दिव्य वस्त्र और दिव्य आभूषण दिये तथा एक ऐसी वैजयन्ती माला भी दी, जो सौन्दर्यका आश्रय एवं कभी न मुरझानेवाले कमलके पुष्पोंसे युक्त थी॥ ८॥

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