श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

बहूनि सन्ति नामानि रूपाणि च सुतस्य ते।

गुणकर्मानुरूपाणि तान्यहं वेद नो जनाः॥ १५

bahūni santi nāmāni rūpāṇi ca sutasya te|

guṇakarmānurūpāṇi tānyahaṃ veda no janāḥ|| 15

अर्थ

तुम्हारे पुत्रके और भी बहुत-से नाम हैं तथा रूप भी अनेक हैं। इसके जितने गुण हैं और जितने कर्म, उन सबके अनुसार अलग-अलग नाम पड़ जाते हैं। मैं तो उन नामोंको जानता हूँ, परन्तु संसारके साधारण लोग नहीं जानते॥ १५॥

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