श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.46

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

राजोवाच

नन्दः किमकरोद् ब्रह्मन् श्रेय एवं महोदयम्।

यशोदा च महाभागा पपौ यस्याः स्तनं हरिः॥ ४६

nandaḥ kimakarod brahman śreya evaṃ mahodayam|

yaśodā ca mahābhāgā papau yasyāḥ stanaṃ hariḥ|| 46

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! नन्दबाबाने ऐसा कौन-सा बहुत बड़ा मंगलमय साधन किया था? और परमभाग्यवती यशोदाजीने भी ऐसी कौन-सी तपस्या की थी, जिसके कारण स्वयं भगवान्‌ने अपने श्रीमुखसे उनका स्तनपान किया॥ ४६॥

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