श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.50

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अस्त्वित्युक्तः स भगवान् व्रजे द्रोणो महायशाः।

जज्ञे नन्द इति ख्यातो यशोदा सा धराभवत्॥ ५०

astvityuktaḥ sa bhagavān vraje droṇo mahāyaśāḥ|

jajñe nanda iti khyāto yaśodā sā dharābhavat|| 50

अर्थ

ब्रह्माजीने कहा—‘ऐसा ही होगा ।’ वे ही परमयशस्वी भगवन्मय द्रोण व्रजमें पैदा हुए और उनका नाम हुआ नन्द। और वे ही धरा इस जन्ममें यशोदाके नामसे उनकी पत्‍नी हुईं॥ ५०॥

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