श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.80.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 80 · अथाशीतितमोऽध्यायः

सख्युः प्रियस्य विप्रर्षेरंगसंगातिनिर्वृतः।

प्रीतो व्यमुंचदब्बिन्दून् नेत्राभ्यां पुष्करेक्षणः॥ १९

sakhyuḥ priyasya viprarṣeraṃgasaṃgātinirvṛtaḥ|

prīto vyamuṃcadabbindūn netrābhyāṃ puṣkarekṣaṇaḥ|| 19

अर्थ

परीक्षित्! परमानन्दस्वरूप भगवान् अपने प्यारे सखा ब्राह्मणदेवताके अंग-स्पर्शसे अत्यन्त आनन्दित हुए। उनके कमलके समान कोमल नेत्रोंसे प्रेमके आँसू बरसने लगे॥ १९॥

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