श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.80.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 80 · अथाशीतितमोऽध्यायः

तं विलोक्याच्युतो दूरात् प्रियापर्यंकमास्थितः।

सहसोत्थाय चाभ्येत्य दोर्भ्यां पर्यग्रहीन्मुदा॥ १८

taṃ vilokyācyuto dūrāt priyāparyaṃkamāsthitaḥ|

sahasotthāya cābhyetya dorbhyāṃ paryagrahīnmudā|| 18

अर्थ

उस समय भगवान् श्रीकृष्ण अपनी प्राणप्रिया रुक्मिणीजीके पलंगपर विराजे हुए थे। ब्राह्मणदेवताको दूरसे ही देखकर वे सहसा उठ खड़े हुए और उनके पास आकर बड़े आनन्दसे उन्हें अपने भुजपाशमें बाँध लिया॥ १८॥

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