स्वर्ग, मोक्ष, पृथ्वी और रसातलकी सम्पत्ति तथा समस्त योगसिद्धियोंकी प्राप्तिका मूल उनके चरणोंकी पूजा ही है॥ १९॥
स्वर्गापवर्गयोः पुंसां रसायां भुवि सम्पदाम्।
सर्वासामपि सिद्धीनां मूलं तच्चरणार्चनम्॥ १९
स्वर्ग, मोक्ष, पृथ्वी और रसातलकी सम्पत्ति तथा समस्त योगसिद्धियोंकी प्राप्तिका मूल उनके चरणोंकी पूजा ही है॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.81.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 626) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/81/19/