हाथीके दाँतके बने हुए और सोनेके पातसे मँढ़े हुए पलंगोंपर दूधके फेनकी तरह श्वेत और कोमल बिछौने बिछ रहे थे। बहुत-से चँवर वहाँ रखे हुए थे, जिनमें सोनेकी डंडियाँ लगी हुई थीं॥ २९॥
पयःफेननिभाः शय्या दान्ता रुक्मपरिच्छदाः।
पर्यंका हेमदण्डानि चामरव्यजनानि च॥ २९
हाथीके दाँतके बने हुए और सोनेके पातसे मँढ़े हुए पलंगोंपर दूधके फेनकी तरह श्वेत और कोमल बिछौने बिछ रहे थे। बहुत-से चँवर वहाँ रखे हुए थे, जिनमें सोनेकी डंडियाँ लगी हुई थीं॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.81.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 627) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/81/29/