श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.81.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 81 · अथैकाशीतितमोऽध्यायः

आसनानि च हैमानि मृदूपस्तरणानि च।

मुक्तादामविलम्बीनि वितानानि द्युमन्ति च॥ ३०

āsanāni ca haimāni mṛdūpastaraṇāni ca|

muktādāmavilambīni vitānāni dyumanti ca|| 30

अर्थ

सोनेके सिंहासन शोभायमान हो रहे थे, जिनपर बड़ी कोमल-कोमल गद्दियाँ लगी हुई थीं! ऐसे चँदोवे भी झिलमिला रहे थे जिनमें मोतियोंकी लड़ियाँ लटक रही थीं॥ ३०॥

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