श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.81.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 81 · अथैकाशीतितमोऽध्यायः

स्वच्छस्फटिककुड्येषु महामारकतेषु च।

रत्‍नदीपा भ्राजमाना ललनारत्‍नसंयुताः॥ ३१

svacchasphaṭikakuḍyeṣu mahāmārakateṣu ca|

ratnadīpā bhrājamānā lalanāratnasaṃyutāḥ|| 31

अर्थ

स्फटिकमणिकी स्वच्छ भीतोंपर पन्‍नेकी पच्चीकारी की हुई थी। रत्‍ननिर्मित स्त्रीमूर्तियोंके हाथोंमें रत्‍नोंके दीपक जगमगा रहे थे॥ ३१॥

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