॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.81.4
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः॥ ४
patraṃ puṣpaṃ phalaṃ toyaṃ yo me bhaktyā prayacchati|
tadahaṃ bhaktyupahṛtamaśnāmi prayatātmanaḥ|| 4
अर्थ
जो पुरुष प्रेम-भक्तिसे फल-फूल अथवा पत्ता-पानीमेंसे कोई भी वस्तु मुझे समर्पित करता है, तो मैं उस शुद्धचित्त भक्तका वह प्रेमोपहार केवल स्वीकार ही नहीं करता, बल्कि तुरंत भोग लगा लेता हूँ’॥ ४॥