श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.82.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 82 · अथ द‍्व्यशीतितमोऽध्यायः

ततोऽभिवाद्य ते वृद्धान् यविष्ठैरभिवादिताः।

स्वागतं कुशलं पृष्ट्वा चक्रुः कृष्णकथा मिथः॥ १७

tato'bhivādya te vṛddhān yaviṣṭhairabhivāditāḥ|

svāgataṃ kuśalaṃ pṛṣṭvā cakruḥ kṛṣṇakathā mithaḥ|| 17

अर्थ

अवस्था आदिमें छोटोंने बड़े-बूढ़ोंको प्रणाम किया और उन्होंने अपनेसे छोटोंका प्रणाम स्वीकार किया। वे एक-दूसरेका स्वागत करके तथा कुशल-मंगल आदि पूछकर फिर श्रीकृष्णकी मधुर लीलाएँ आपसमें कहने-सुनने लगे॥ १७॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें