श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.82.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 82 · अथ द‍्व्यशीतितमोऽध्यायः

भीष्मो द्रोणोऽम्बिकापुत्रो गान्धारी ससुता तथा।

सदाराः पाण्डवाः कुन्ती सृंजयो विदुरः कृपः॥ २४

bhīṣmo droṇo'mbikāputro gāndhārī sasutā tathā|

sadārāḥ pāṇḍavāḥ kuntī sṛṃjayo viduraḥ kṛpaḥ|| 24

अर्थ

परीक्षित्! भीष्मपितामह, द्रोणाचार्य, धृतराष्ट्र, दुर्योधनादि पुत्रोंके साथ गान्धारी, पत्‍नियोंके सहित युधिष्ठिर आदि पाण्डव, कुन्ती, सृंजय, विदुर, कृपाचार्य, कुन्तिभोज, विराट, भीष्मक, महाराज न‌ग्‍नजित्, पुरुजित्, द्रुपद, शल्य, धृष्टकेतु, काशीनरेश, दमघोष, विशालाक्ष, मिथिलानरेश, मद्रनरेश, केकयनरेश, युधामन्यु, सुशर्मा, अपने पुत्रोंके साथ बाह्लीक और दूसरे भी युधिष्ठिरके अनुयायी नृपति भगवान् श्रीकृष्णका परम सुन्दर श्रीनिकेतन विग्रह और उनकी रानियोंको देखकर अत्यन्त विस्मित हो गये॥ २४—२७॥

यह अर्थ श्लोक 24–27 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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