श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

सन्‍निकर्षो हि मर्त्यानामनादरणकारणम्।

गाङ्गं हित्वा यथान्याम्भस्तत्रत्यो याति शुद्धये॥ ३१

sannikarṣo hi martyānāmanādaraṇakāraṇam|

gāṅgaṃ hitvā yathānyāmbhastatratyo yāti śuddhaye|| 31

अर्थ

संसारमें बहुत पास रहना मनुष्योंके अनादरका कारण हुआ करता है। देखते हैं, गंगातटपर रहनेवाला पुरुष गंगाजल छोड़कर अपनी शुद्धिके लिये दूसरे तीर्थमें जाता है॥ ३१॥

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