श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

नारद उवाच

नातिचित्रमिदं विप्रा वसुदेवो बुभुत्सया।

कृष्णं मत्वार्भकं यन्‍नः पृच्छति श्रेय आत्मनः॥ ३०

nāticitramidaṃ viprā vasudevo bubhutsayā|

kṛṣṇaṃ matvārbhakaṃ yannaḥ pṛcchati śreya ātmanaḥ|| 30

अर्थ

नारदजीने कहा—ऋषियो! यह कोई आश्‍चर्यकी बात नहीं है कि वसुदेवजी श्रीकृष्णको अपना बालक समझकर शुद्ध जिज्ञासाके भावसे अपने कल्याणका साधन हमलोगोंसे पूछ रहे हैं॥ ३०॥

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