॥ श्रीहरिः ॥
वसुदेव भवान् नूनं भक्त्या परमया हरिम्।
जगतामीश्वरं प्रार्चः स यद् वां पुत्रतां गतः॥ ४१
vasudeva bhavān nūnaṃ bhaktyā paramayā harim|
jagatāmīśvaraṃ prārcaḥ sa yad vāṃ putratāṃ gataḥ|| 41
अर्थ
वसुदेवजी! आपने अवश्य ही परम भक्तिसे जगदीश्वरभगवान्की आराधना की है; तभी तो वे आप दोनोंके पुत्र हुए हैं॥ ४१॥
वसुदेव भवान् नूनं भक्त्या परमया हरिम्।
जगतामीश्वरं प्रार्चः स यद् वां पुत्रतां गतः॥ ४१
वसुदेवजी! आपने अवश्य ही परम भक्तिसे जगदीश्वरभगवान्की आराधना की है; तभी तो वे आप दोनोंके पुत्र हुए हैं॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 648) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/84/41/