श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.50

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

तदा रामश्‍च कृष्णश्‍च स्वैः स्वैर्बन्धुभिरन्वितौ।

रेजतुः स्वसुतैर्दारैर्जीवेशौ स्वविभूतिभिः॥ ५०

tadā rāmaśca kṛṣṇaśca svaiḥ svairbandhubhiranvitau|

rejatuḥ svasutairdārairjīveśau svavibhūtibhiḥ|| 50

अर्थ

उस समय भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी अपने-अपने भाई-बन्धु और स्त्री-पुत्रोंके साथ इस प्रकार शोभायमान हुए, जैसे अपनी शक्तियोंके साथ समस्त जीवोंके ईश्‍वर स्वयं भगवान् समष्टि जीवोंके अभिमानी श्रीसंकर्षण तथा अपने विशुद्ध नारायणस्वरूपमें शोभायमान होते हैं॥ ५०॥

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