श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.85.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 85 · अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायः

चिरान्मृतसुतादाने गुरुणा कालचोदितौ।

आनिन्यथुः पितृस्थानाद् गुरवे गुरुदक्षिणाम्॥ ३२

cirānmṛtasutādāne guruṇā kālacoditau|

āninyathuḥ pitṛsthānād gurave gurudakṣiṇām|| 32

अर्थ

मैंने सुना है कि तुम्हारे गुरु सान्दीपनिजीके पुत्रको मरे बहुत दिन हो गये थे। उनको गुरुदक्षिणा देनेके लिये उनकी आज्ञा तथा कालकी प्रेरणासे तुम दोनोंने उनके पुत्रको यमपुरीसे वापस ला दिया॥ ३२॥

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