श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.85.56

दशम स्कन्ध · अध्याय 85 · अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायः

ते नमस्कृत्य गोविन्दं देवकीं पितरं बलम्।

मिषतां सर्वभूतानां ययुर्धाम दिवौकसाम्॥ ५६

te namaskṛtya govindaṃ devakīṃ pitaraṃ balam|

miṣatāṃ sarvabhūtānāṃ yayurdhāma divaukasām|| 56

अर्थ

इसके बाद उन लोगोंने भगवान् श्रीकृष्ण, माता देवकी, पिता वसुदेव और बलरामजीको नमस्कार किया। तदनन्तर सबके सामने ही वे देवलोकमें चले गये॥ ५६॥✎ 1719

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1719 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: असुर-योनिमें → असुरयोनिमें

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