श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

तच्छ्रुत्वा क्षुभितो रामः पर्वणीव महार्णवः।

गृहीतपादः कृष्णेन सुहृद्भिश्‍चान्वशाम्यत१॥ ११

tacchrutvā kṣubhito rāmaḥ parvaṇīva mahārṇavaḥ|

gṛhītapādaḥ kṛṣṇena suhṛdbhiścānvaśāmyata|| 11

अर्थ

यह समाचार सुनकर बलरामजी बहुत बिगड़े। वे वैसे ही क्षुब्ध हो उठे, जैसे पूर्णिमाके दिन समुद्र। परन्तु भगवान् श्रीकृष्ण तथा अन्य सुहृद्-सम्बन्धियोंने उनके पैर पकड़कर उन्हें बहुत कुछ समझाया-बुझाया, तब वे शान्त हुए॥ ११॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    श्‍चानुसान्त्वितः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 661)

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