श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

तत्र तत्र तमायान्तं पौरा जानपदा नृप।

उपतस्थुः सार्घ्यहस्ता ग्रहैः सूर्यमिवोदितम्॥ १९

tatra tatra tamāyāntaṃ paurā jānapadā nṛpa|

upatasthuḥ sārghyahastā grahaiḥ sūryamivoditam|| 19

अर्थ

परीक्षित्! वे जहाँ-जहाँ पहुँचते, वहाँ-वहाँकी नागरिक और ग्रामवासी प्रजा पूजाकी सामग्री लेकर उपस्थित होती। पूजा करनेवालोंको भगवान् ऐसे जान पड़ते, मानो ग्रहोंके साथ साक्षात् सूर्यनारायण उदय हो रहे हों॥ १९॥

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