श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

महत्यां देवयात्रायां रथस्थां दुर्गनिर्गताम्।

जहारानुमतः पित्रोः कृष्णस्य च महारथः॥ ९

mahatyāṃ devayātrāyāṃ rathasthāṃ durganirgatām|

jahārānumataḥ pitroḥ kṛṣṇasya ca mahārathaḥ|| 9

अर्थ

एक बार सुभद्राजी देव-दर्शनके लिये रथपर सवार होकर द्वारका-दुर्गसे बाहर निकलीं। उसी समय महारथी अर्जुनने देवकी-वसुदेव और श्रीकृष्णकी अनुमतिसे सुभद्राका हरण कर लिया॥ ९॥

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