एक बार सुभद्राजी देव-दर्शनके लिये रथपर सवार होकर द्वारका-दुर्गसे बाहर निकलीं। उसी समय महारथी अर्जुनने देवकी-वसुदेव और श्रीकृष्णकी अनुमतिसे सुभद्राका हरण कर लिया॥ ९॥
महत्यां देवयात्रायां रथस्थां दुर्गनिर्गताम्।
जहारानुमतः पित्रोः कृष्णस्य च महारथः॥ ९
एक बार सुभद्राजी देव-दर्शनके लिये रथपर सवार होकर द्वारका-दुर्गसे बाहर निकलीं। उसी समय महारथी अर्जुनने देवकी-वसुदेव और श्रीकृष्णकी अनुमतिसे सुभद्राका हरण कर लिया॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.86.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 661) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/86/9/