श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.87.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 87 · अथ सप्ताशीतितमोऽध्यायः

तस्मै ह्यवोचद् भगवानृषीणां शृण्वतामिदम्।

यो ब्रह्मवादः पूर्वेषां जनलोकनिवासिनाम्॥ ८

tasmai hyavocad bhagavānṛṣīṇāṃ śṛṇvatāmidam|

yo brahmavādaḥ pūrveṣāṃ janalokanivāsinām|| 8

अर्थ

भगवान् नारायणने ऋषियोंकी उस भरी सभामें नारदजीको उनके प्रश्‍नका उत्तर दिया और वह कथा सुनायी, जो पूर्वकालीन जनलोकनिवासियोंमें परस्पर वेदोंके तात्पर्य और ब्रह्मके स्वरूपके सम्बन्धमें विचार करते समय कही गयी थी॥ ८॥

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