श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! शिवजी सदा अपनी शक्तिसे युक्त रहते हैं। वे सत्त्व आदि गुणोंसे युक्त तथा अहंकारके अधिष्ठाता हैं। अहंकारके तीन भेद हैं—वैकारिक, तैजस और तामस॥ ३॥✎ 896
शिवः शक्तियुतः शश्वत् त्रिलिंगो गुणसंवृतः।
वैकारिकस्तैजसश्च तामसश्चेत्यहं त्रिधा॥ ३
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! शिवजी सदा अपनी शक्तिसे युक्त रहते हैं। वे सत्त्व आदि गुणोंसे युक्त तथा अहंकारके अधिष्ठाता हैं। अहंकारके तीन भेद हैं—वैकारिक, तैजस और तामस॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 688) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/88/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)