sa sarvadṛgupadraṣṭā taṃ bhajan nirguṇo bhavet|| 5
अर्थ
परन्तु परीक्षित्! भगवान् श्रीहरि तो प्रकृतिसे परे स्वयं पुरुषोत्तम एवं प्राकृत गुणरहित हैं। वे सर्वज्ञ तथा सबके अन्तःकरणोंके साक्षी हैं। जो उनका भजन करता है, वह स्वयं भी गुणातीत हो जाता है॥ ५॥✎ 896
हरिर्हि निर्गुणः साक्षात् पुरुषः प्रकृतेः परः।
स सर्वदृगुपद्रष्टा तं भजन् निर्गुणो भवेत्॥ ५
परन्तु परीक्षित्! भगवान् श्रीहरि तो प्रकृतिसे परे स्वयं पुरुषोत्तम एवं प्राकृत गुणरहित हैं। वे सर्वज्ञ तथा सबके अन्तःकरणोंके साक्षी हैं। जो उनका भजन करता है, वह स्वयं भी गुणातीत हो जाता है॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 688) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/88/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)