श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

धर्मः साक्षाद् यतो ज्ञानं वैराग्यं च तदन्वितम्।

ऐश्‍वर्यं चाष्टधा यस्माद् यशश्‍चात्ममलापहम्॥ १६

dharmaḥ sākṣād yato jñānaṃ vairāgyaṃ ca tadanvitam|

aiśvaryaṃ cāṣṭadhā yasmād yaśaścātmamalāpaham|| 16

अर्थ

भगवान् विष्णुसे ही साक्षात् धर्म, ज्ञान, वैराग्य, आठ प्रकारके ऐश्‍वर्य और चित्तको शुद्ध करनेवाला यश प्राप्त होता है॥ १६॥

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