श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

विप्रो गृहीत्वा मृतकं राजद्वार्युपधाय सः।

इदं प्रोवाच विलपन्‍नातुरो दीनमानसः॥ २३

vipro gṛhītvā mṛtakaṃ rājadvāryupadhāya saḥ|

idaṃ provāca vilapannāturo dīnamānasaḥ|| 23

अर्थ

ब्राह्मण अपने बालकका मृत शरीर लेकर राजमहलके द्वारपर गया और वहाँ उसे रखकर अत्यन्त आतुरता और दुःखी मनसे विलाप करता हुआ यह कहने लगा—॥ २३॥✎ 897

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #897 शब्दोंके बीचका स्थान: २४॥जो → २४॥ जो

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