kṣatrabandhoḥ karmadoṣāt paṃcatvaṃ me gato'rbhakaḥ|| 24
अर्थ
‘इसमें सन्देह नहीं कि ब्राह्मणद्रोही, धूर्त, कृपण और विषयी राजाके कर्मदोषसे ही मेरे बालककी मृत्यु हुई है॥ २४॥✎ 897
ब्रह्मद्विषः शठधियो लुब्धस्य विषयात्मनः।
क्षत्रबन्धोः कर्मदोषात् पंचत्वं मे गतोऽर्भकः॥ २४
‘इसमें सन्देह नहीं कि ब्राह्मणद्रोही, धूर्त, कृपण और विषयी राजाके कर्मदोषसे ही मेरे बालककी मृत्यु हुई है॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 695) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/89/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)