॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.89.29
धनदारात्मजापृक्ता यत्र शोचन्ति ब्राह्मणाः।
ते वै राजन्यवेषेण नटा जीवन्त्यसुम्भराः॥ २९
dhanadārātmajāpṛktā yatra śocanti brāhmaṇāḥ|
te vai rājanyaveṣeṇa naṭā jīvantyasumbharāḥ|| 29
अर्थ
जिनके राज्यमें धन, स्त्री अथवा पुत्रोंसे वियुक्त होकर ब्राह्मण दुःखी होते हैं, वे क्षत्रिय नहीं हैं, क्षत्रियके वेषमें पेट पालनेवाले नट हैं। उनका जीवन व्यर्थ है॥ २९॥✎ 897