श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

प्रसूतिकाल आसन्‍ने भार्याया द्विजसत्तमः।

पाहि पाहि प्रजां मृत्योरित्याहार्जुनमातुरः॥ ३६

prasūtikāla āsanne bhāryāyā dvijasattamaḥ|

pāhi pāhi prajāṃ mṛtyorityāhārjunamāturaḥ|| 36

अर्थ

प्रसवका समय निकट आनेपर ब्राह्मण आतुर होकर अर्जुनके पास आया और कहने लगा—‘इस बार तुम मेरे बच्चेको मृत्युसे बचा लो’॥ ३६॥

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