श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.37

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

स उपस्पृश्य शुच्यम्भो नमस्कृत्य महेश्‍वरम्।

दिव्यान्यस्त्राणि संस्मृत्य सज्यं गाण्डीवमाददे॥ ३७

sa upaspṛśya śucyambho namaskṛtya maheśvaram|

divyānyastrāṇi saṃsmṛtya sajyaṃ gāṇḍīvamādade|| 37

अर्थ

यह सुनकर अर्जुनने शुद्ध जलसे आचमन किया, तथा भगवान् शंकरको नमस्कार किया। फिर दिव्य अस्त्रोंका स्मरण किया और गाण्डीव धनुषपर डोरी चढ़ाकर उसे हाथमें ले लिया॥ ३७॥

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