भगवान्की पत्नियाँ कभी-कभी हँसते-हँसते पिचकारियोंसे उन्हें भिगो देती थीं। वे भी उनको तर कर देते। इस प्रकार भगवान् अपनी पत्नियोंके साथ क्रीडा करते; मानो यक्षराज कुबेर यक्षिणियोंके साथ विहार कर रहे हों॥ ९॥
सिच्यमानोऽच्युतस्ताभिर्हसन्तीभिः स्म रेचकैः।
प्रतिसिञ्चन् विचिक्रीडे यक्षीभिर्यक्षराडिव॥ ९
भगवान्की पत्नियाँ कभी-कभी हँसते-हँसते पिचकारियोंसे उन्हें भिगो देती थीं। वे भी उनको तर कर देते। इस प्रकार भगवान् अपनी पत्नियोंके साथ क्रीडा करते; मानो यक्षराज कुबेर यक्षिणियोंके साथ विहार कर रहे हों॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.90.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 702) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/90/9/