श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.1.13

एकादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

क्रीडन्तस्तानुपव्रज्य कुमारा यदुनन्दनाः।

उपसंगृह्य पप्रच्छुरविनीता विनीतवत्॥ १३

krīḍantastānupavrajya kumārā yadunandanāḥ|

upasaṃgṛhya papracchuravinītā vinītavat|| 13

अर्थ

एक दिन यदुवंशके कुछ उद्दण्ड कुमार खेलते-खेलते उनके पास जा निकले। उन्होंने बनावटी नम्रतासे उनके चरणोंमें प्रणाम करके प्रश्‍न किया॥ १३॥

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