श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.1.24

एकादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

भगवाञ्ज्ञातसर्वार्थ ईश्‍वरोऽपि तदन्यथा।

कर्तुं नैच्छद् विप्रशापं कालरूप्यन्वमोदत॥ २४

bhagavāñjñātasarvārtha īśvaro'pi tadanyathā|

kartuṃ naicchad vipraśāpaṃ kālarūpyanvamodata|| 24

अर्थ

भगवान् सब कुछ जानते थे। वे इस शापको उलट भी सकते थे। फिर भी उन्होंने ऐसा करना उचित न समझा। कालरूपधारी प्रभुने ब्राह्मणोंके शापका अनुमोदन ही किया॥ २४॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामेकादशस्कन्धे
प्रथमोऽध्यायः॥ १॥

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