भगवाञ्ज्ञातसर्वार्थ ईश्वरोऽपि तदन्यथा।
कर्तुं नैच्छद् विप्रशापं कालरूप्यन्वमोदत॥ २४
भगवान् सब कुछ जानते थे। वे इस शापको उलट भी सकते थे। फिर भी उन्होंने ऐसा करना उचित न समझा। कालरूपधारी प्रभुने ब्राह्मणोंके शापका अनुमोदन ही किया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.1.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 712) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/1/24/