श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.10.37

एकादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

एतदच्युत मे ब्रूहि प्रश्‍नं प्रश्‍नविदां वर।

नित्यमुक्तो नित्यबद्ध एक एवेति मे भ्रमः॥ ३७

etadacyuta me brūhi praśnaṃ praśnavidāṃ vara|

nityamukto nityabaddha eka eveti me bhramaḥ|| 37

अर्थ

अच्युत! प्रश्‍नका मर्म जाननेवालोंमें आप श्रेष्ठ हैं। इसलिये आप मेरे इस प्रश्‍नका उत्तर दीजिये—एक ही आत्मा अनादि गुणोंके संसर्गसे नित्यबद्ध भी मालूम पड़ता है और असंग होनेके कारण नित्यमुक्त भी। इस बातको लेकर मुझे भ्रम हो रहा है॥ ३७॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामेकादशस्कन्धे भगवदुद्धवसंवादे

दशमोऽध्यायः॥ १०॥

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