श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.16

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

पुत्रा हिरण्यगर्भस्य मानसाः सनकादयः।

पप्रच्छुः पितरं सूक्ष्मां योगस्यैकान्तिकीं गतिम्॥ १६

putrā hiraṇyagarbhasya mānasāḥ sanakādayaḥ|

papracchuḥ pitaraṃ sūkṣmāṃ yogasyaikāntikīṃ gatim|| 16

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्रिय उद्धव! सनकादि परमर्षि ब्रह्माजीके मानस पुत्र हैं। उन्होंने एक बार अपने पितासे योगकी सूक्ष्म अन्तिम सीमाके सम्बन्धमें इस प्रकार प्रश्‍न किया था॥ १६॥

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