tathāpi bhuṃjate kṛṣṇa tat kathaṃ śvakharājavat|| 8
अर्थ
उद्धवजीने पूछा—भगवन्! प्रायः सभी मनुष्य इस बातको जानते हैं कि विषय विपत्तियोंके घर हैं; फिर भी वे कुत्ते, गधे और बकरेके समान दुःख सहन करके भी उन्हींको ही भोगते रहते हैं। इसका क्या कारण है?॥ ८॥
विदन्ति मर्त्याः प्रायेण विषयान् पदमापदाम्।
तथापि भुंजते कृष्ण तत् कथं श्वखराजवत्॥ ८
उद्धवजीने पूछा—भगवन्! प्रायः सभी मनुष्य इस बातको जानते हैं कि विषय विपत्तियोंके घर हैं; फिर भी वे कुत्ते, गधे और बकरेके समान दुःख सहन करके भी उन्हींको ही भोगते रहते हैं। इसका क्या कारण है?॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.13.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 793) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/13/8/