श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.14.10

एकादश स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

धर्ममेके यशश्‍चान्ये कामं सत्यं दमं शमम्।

अन्ये वदन्ति स्वार्थं वा ऐश्‍वर्यं त्यागभोजनम्॥ १०

dharmameke yaśaścānye kāmaṃ satyaṃ damaṃ śamam|

anye vadanti svārthaṃ vā aiśvaryaṃ tyāgabhojanam|| 10

अर्थ

पूर्वमीमांसक धर्मको, साहित्याचार्य यशको, कामशास्त्री कामको, योगवेत्ता सत्य और शमदमादिको, दण्डनीतिकार ऐश्‍वर्यको, त्यागी त्यागको और लोकायतिक भोगको ही मनुष्य-जीवनका स्वार्थ—परम लाभ बतलाते हैं॥ १०॥

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