॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.14.13
अकिंचनस्य दान्तस्य शान्तस्य समचेतसः।
मया सन्तुष्टमनसः सर्वाः सुखमया दिशः॥ १३
akiṃcanasya dāntasya śāntasya samacetasaḥ|
mayā santuṣṭamanasaḥ sarvāḥ sukhamayā diśaḥ|| 13
अर्थ
जो सब प्रकारके संग्रह-परिग्रहसे रहित—अकिंचन है, जो अपनी इन्द्रियोंपर विजय प्राप्त करके शान्त और समदर्शी हो गया है, जो मेरी प्राप्तिसे ही मेरे सान्निध्यका अनुभव करके ही सदा-सर्वदा पूर्ण सन्तोषका अनुभव करता है, उसके लिये आकाशका एक-एक कोना आनन्दसे भरा हुआ है॥ १३॥