श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.14.32

एकादश स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

सम आसन आसीनः समकायो यथासुखम्।

हस्तावुत्संग आधाय स्वनासाग्रकृतेक्षणः॥ ३२

sama āsana āsīnaḥ samakāyo yathāsukham|

hastāvutsaṃga ādhāya svanāsāgrakṛtekṣaṇaḥ|| 32

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्रिय उद्धव! जो न तो बहुत ऊँचा हो और न बहुत नीचा ही—ऐसे आसनपर शरीरको सीधा रखकर आरामसे बैठ जाय, हाथोंको अपनी गोदमें रख ले और दृष्टि अपनी नासिकाके अग्रभागपर जमावे॥ ३२॥

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