श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.17

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

ऐरावतं गजेन्द्राणां यादसां वरुणं प्रभुम्।

तपतां द्युमतां सूर्यं मनुष्याणां च भूपतिम्॥ १७

airāvataṃ gajendrāṇāṃ yādasāṃ varuṇaṃ prabhum|

tapatāṃ dyumatāṃ sūryaṃ manuṣyāṇāṃ ca bhūpatim|| 17

अर्थ

मैं गजराजोंमें ऐरावत, जलनिवासियोंमें उनका प्रभु वरुण, तपने और चमकनेवालोंमें सूर्य तथा मनुष्योंमें राजा हूँ॥ १७॥✎ 1748 1749

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1748 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ज्ञान-शक्तिप्रधान → ज्ञानशक्तिप्रधान
  • #1749 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: क्रिया-शक्ति-प्रधान → क्रिया-शक्तिप्रधान

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