श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.27

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

संवत्सरोऽस्म्यनिमिषामृतूनां मधुमाधवौ।

मासानां मार्गशीर्षोऽहं नक्षत्राणां तथाभिजित्॥ २७

saṃvatsaro'smyanimiṣāmṛtūnāṃ madhumādhavau|

māsānāṃ mārgaśīrṣo'haṃ nakṣatrāṇāṃ tathābhijit|| 27

अर्थ

सदा सावधान रहकर जागनेवालोंमें संवत्सररूप काल मैं हूँ, ऋतुओंमें वसन्त, महीनोंमें मार्गशीर्ष और नक्षत्रोंमें अभिजित् हूँ॥ २७॥✎ 1750

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1750 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: महा-पुरुषोंमें) → महापुरुषोंमें)

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