श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.29

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

वासुदेवो भगवतां त्वं तु भागवतेष्वहम्।

किंपुरुषाणां हनुमान् विद्याध्राणां सुदर्शनः॥ २९

vāsudevo bhagavatāṃ tvaṃ tu bhāgavateṣvaham|

kiṃpuruṣāṇāṃ hanumān vidyādhrāṇāṃ sudarśanaḥ|| 29

अर्थ

सृष्टिकी उत्पत्ति और लय, प्राणियोंके जन्म और मृत्यु तथा विद्या और अविद्याके जाननेवाले भगवानोंमें (विशिष्ट महापुरुषोंमें) मैं वासुदेव हूँ। मेरे प्रेमी भक्तोंमें तुम (उद्धव), किम्पुरुषोंमें हनुमान्, विद्याधरोंमें सुदर्शन (जिसने अजगरके रूपमें नन्दबाबाको ग्रस लिया था और फिर भगवान्‌के पादस्पर्शसे मुक्त हो गया था) मैं हूँ॥ २९॥✎ 1750

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1750 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: महा-पुरुषोंमें) → महापुरुषोंमें)

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