श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.34

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

अपां रसश्‍च परमस्तेजिष्ठानां विभावसुः।

प्रभा सूर्येन्दुताराणां शब्दोऽहं नभसः परः॥ ३४

apāṃ rasaśca paramastejiṣṭhānāṃ vibhāvasuḥ|

prabhā sūryendutārāṇāṃ śabdo'haṃ nabhasaḥ paraḥ|| 34

अर्थ

मैं जलमें रस, तेजस्वियोंमें परम तेजस्वी अग्‍नि; सूर्य, चन्द्र और तारोंमें प्रभा तथा आकाशमें उसका एकमात्र गुण शब्द हूँ॥ ३४॥

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