॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.18.19
बहिर्जलाशयं गत्वा तत्रोपस्पृश्य वाग्यतः।
विभज्य पावितं शेषं भुंजीताशेषमाहृतम्॥ १९
bahirjalāśayaṃ gatvā tatropaspṛśya vāgyataḥ|
vibhajya pāvitaṃ śeṣaṃ bhuṃjītāśeṣamāhṛtam|| 19
अर्थ
इस प्रकार भिक्षा लेकर बस्तीके बाहर जलाशयपर जाय, वहाँ हाथ-पैर धोकर जलके द्वारा भिक्षा पवित्र कर ले; फिर शास्त्रोक्त पद्धतिसे जिन्हें भिक्षाका भाग देना चाहिये, उन्हें देकर जो कुछ बचे उसे मौन होकर खा ले। दूसरे समयके लिये बचाकर न रखे और न अधिक माँगकर ही लाये॥ १९॥