॥ श्रीहरिः ॥
केशरोमनखश्मश्रुमलानि बिभृयाद् दतः।
न धावेदप्सु मज्जेत त्रिकालं स्थण्डिलेशयः॥ ३
keśaromanakhaśmaśrumalāni bibhṛyād dataḥ|
na dhāvedapsu majjeta trikālaṃ sthaṇḍileśayaḥ|| 3
अर्थ
केश, रोएँ, नख और मूँछ-दाढ़ीरूप शरीरके मलको हटावे नहीं। दातुन न करे। जलमें घुसकर त्रिकाल स्नान करे और धरतीपर ही पड़ रहे॥ ३॥
केशरोमनखश्मश्रुमलानि बिभृयाद् दतः।
न धावेदप्सु मज्जेत त्रिकालं स्थण्डिलेशयः॥ ३
केश, रोएँ, नख और मूँछ-दाढ़ीरूप शरीरके मलको हटावे नहीं। दातुन न करे। जलमें घुसकर त्रिकाल स्नान करे और धरतीपर ही पड़ रहे॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.18.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 821) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/18/3/