॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.18.30
वेदवादरतो न स्यान्न पाखण्डी न हैतुकः।
शुष्कवादविवादे न कंचित् पक्षं समाश्रयेत्॥ ३०
vedavādarato na syānna pākhaṇḍī na haitukaḥ|
śuṣkavādavivāde na kaṃcit pakṣaṃ samāśrayet|| 30
अर्थ
उसे चाहिये कि वेदोंके कर्मकाण्ड-भागकी व्याख्यामें न लगे, पाखण्ड न करे, तर्क-वितर्कसे बचे और जहाँ कोरा वाद-विवाद हो रहा हो, वहाँ कोई पक्ष न ले॥ ३०॥