श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.19.36

एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

शमो मन्‍निष्ठता बुद्धेर्दम इन्द्रियसंयमः।

तितिक्षा दुःखसंमर्षो जिह्वोपस्थजयो धृतिः॥ ३६

śamo manniṣṭhatā buddherdama indriyasaṃyamaḥ|

titikṣā duḥkhasaṃmarṣo jihvopasthajayo dhṛtiḥ|| 36

अर्थ

बुद्धिका मुझमें लग जाना ही ‘शम’ है। इन्द्रियोंके संयमका नाम ‘दम’ है। न्यायसे प्राप्त दुःखके सहनेका नाम ‘तितिक्षा’ है। जिह्वा और जननेन्द्रियपर विजय प्राप्त करना ‘धैर्य’ है॥ ३६॥

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