॥ श्रीहरिः ॥
तस्माज्ज्ञानेन सहितं ज्ञात्वा स्वात्मानमुद्धव।
ज्ञानविज्ञानसम्पन्नो भज मां भक्तिभावितः॥ ५
tasmājjñānena sahitaṃ jñātvā svātmānamuddhava|
jñānavijñānasampanno bhaja māṃ bhaktibhāvitaḥ|| 5
अर्थ
इसलिये मेरे प्यारे उद्धव! तुम ज्ञानके सहित अपने आत्मस्वरूपको जान लो और फिर ज्ञान-विज्ञानसे सम्पन्न होकर भक्तिभावसे मेरा भजन करो॥ ५॥
तस्माज्ज्ञानेन सहितं ज्ञात्वा स्वात्मानमुद्धव।
ज्ञानविज्ञानसम्पन्नो भज मां भक्तिभावितः॥ ५
इसलिये मेरे प्यारे उद्धव! तुम ज्ञानके सहित अपने आत्मस्वरूपको जान लो और फिर ज्ञान-विज्ञानसे सम्पन्न होकर भक्तिभावसे मेरा भजन करो॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.19.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 828) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/19/5/