जिनके गुण, लीला और नाम आदिका श्रवण तथा कीर्तन पतितोंको भी पावन करनेवाला है, उन्हीं परम कल्याणस्वरूप मेरे आराध्यदेव भगवान् नारायणका तुमने आज मुझे स्मरण कराया है॥ १३॥
त्वया परमकल्याणः पुण्यश्रवणकीर्तनः।
स्मारितो भगवानद्य देवो नारायणो मम॥ १३
जिनके गुण, लीला और नाम आदिका श्रवण तथा कीर्तन पतितोंको भी पावन करनेवाला है, उन्हीं परम कल्याणस्वरूप मेरे आराध्यदेव भगवान् नारायणका तुमने आज मुझे स्मरण कराया है॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.2.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 715) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/2/13/